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Shri Yagyavalkya Smriti Set of 2 Vols. | श्रीयाज्ञवल्क्यस्मृतिः

Original price was: ₹1,495.00.Current price is: ₹970.00.

Author T. Ganapati Shastri
Publisher The Bharatiya Vidya Prakashan
Language Sanskrit
Edition 2025
ISBN 978-93-91512-90-3
Pages 584
Cover Hard Cover
Size 14 x 2 x 22 (l x w x h)
Categories: ,

Description

श्रीयाज्ञवल्क्यस्मृतिः 2 भागों में (Shri Yagyavalkya Smriti Set of 2 Vols.) भारतीय धर्मशास्त्र परम्परा का एक महत्वपूर्ण स्मृतिग्रन्थ है, जो दो भागों में प्रकाशित है। यह ग्रन्थ भारतीय विद्या प्रकाशन, वाराणसी द्वारा प्रकाशित किया गया है। इसका संशोधन टी. गणपतिशास्त्री द्वारा तथा सम्पादन प्रो. माधव जनार्दन रटाटे द्वारा किया गया है। यह हार्डकवर संस्करण में 584 पृष्ठों के साथ संस्कृत भाषा में उपलब्ध है।

इस संस्करण में विश्वरूपाचार्य प्रणीत ‘बालक्रीड़ा’ टीका का समावेश किया गया है। यह टीका कठिन स्थलों को समझने तथा विषय को स्पष्ट करने में सहायक है। ग्रन्थ को दो भागों में व्यवस्थित किया गया है।

प्रथम भाग में आचार अध्याय एवं व्यवहार अध्याय का निरूपण है। आचाराध्याय में ब्रह्मचारी के धर्म, विवाह के विभिन्न प्रकार, गृहस्थ धर्म, वानप्रस्थ धर्म, संन्यास धर्म, राजधर्म तथा श्राद्ध आदि विषयों का विवेचन किया गया है। व्यवहाराध्याय में व्यवहार के चार पाद तथा उनके अठारह भेदों का वर्णन मिलता है।

द्वितीय भाग में प्रायश्चित्त अध्याय का निरूपण किया गया है। इसमें आशौच का अर्थ एवं विचार, आपद् धर्म, वानप्रस्थ एवं संन्यासियों के धर्म, महापाप, उपपाप तथा उनके प्रायश्चित्त आदि विषयों का विस्तृत विवेचन प्रस्तुत किया गया है।

याज्ञवल्क्यस्मृति धर्म, आचार, सामाजिक व्यवस्था, व्यवहार एवं प्रायश्चित्त से सम्बन्धित भारतीय शास्त्रीय परम्परा को समझने के लिए महत्वपूर्ण स्रोत है। संस्कृत मूलपाठ के साथ बालक्रीड़ा टीका का समावेश इसे अध्ययन एवं शोध की दृष्टि से उपयोगी बनाता है।

श्रीयाज्ञवल्क्यस्मृतिः 2 भागों में (Shri Yagyavalkya Smriti Set of 2 Vols.) पुस्तक का महत्त्व

श्रीयाज्ञवल्क्यस्मृतिः का महत्त्व भारतीय धर्मशास्त्र एवं स्मृति-परम्परा के अध्ययन में विशेष है। इसमें व्यक्ति के आचार-विचार से लेकर गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं संन्यास धर्म, राजधर्म, श्राद्ध, सामाजिक व्यवहार तथा प्रायश्चित्त जैसे अनेक विषयों का शास्त्रीय विवेचन मिलता है।

विश्व रूपाचार्य की बालक्रीड़ा टीका इस संस्करण की प्रमुख विशेषता है। टीका कठिन स्थलों को स्पष्ट करने और विषय के अर्थ को समझने में सहायक होती है। दो भागों में व्यवस्थित यह ग्रन्थ धर्मशास्त्र, संस्कृत, भारतीय परम्परा एवं प्राचीन विधि-विचार का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों, अध्येताओं और शोधार्थियों के लिए उपयोगी संदर्भ ग्रन्थ है।