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Kalki Puran (कल्किपुराण)

Original price was: ₹501.00.Current price is: ₹375.00.

Author Acharya Brij Mohan Pathak
Publisher Shri Kashi Vishwanath Sansthan
Language Sanskrit & Hindi
Edition 2026
ISBN 978-81-685408-1-1
Pages 328
Cover Hard Cover
Size 14 x 4 x 22 (l x w x h)
Categories: ,

Description

कल्किपुराण (Kalki Puran) भगवान विष्णु के अंतिम अवतार भगवान कल्कि के प्राकट्य, धर्म की पुनर्स्थापना तथा कलियुग के अंत का अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक पुराण है। यह ग्रन्थ श्रीकाशी विश्वनाथ संस्थान, वाराणसी द्वारा प्रकाशित किया गया है। इसमें संस्कृत मूल पाठ, सरल हिन्दी अनुवाद तथा शब्दानुक्रमणिका दी गई है, जिससे संस्कृत एवं हिन्दी दोनों के पाठकों के लिए इसका अध्ययन अत्यंत सरल और उपयोगी बन जाता है।

महर्षि वेदव्यास प्रणीत इस ग्रन्थ का सम्पादन आचार्य बृजमोहन पाठक द्वारा किया गया है। हार्डकवर संस्करण में प्रकाशित यह पुस्तक 328 पृष्ठों में भगवान कल्कि के दिव्य चरित्र, सनातन धर्म की पुनर्स्थापना, कलियुग के दोषों तथा धर्म के शाश्वत सिद्धांतों का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत करती है।

ग्रन्थ में सूतजी एवं शौनकादि ऋषियों के संवाद से आरम्भ होकर कलियुग की स्थिति, अधर्म का विस्तार, भगवान कल्कि का शम्भल ग्राम में अवतार, भगवान परशुराम से शिक्षा, भगवान शिव से दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्राप्ति तथा धर्म की पुनर्स्थापना का अत्यंत रोचक एवं प्रेरक वर्णन मिलता है।

इस पुराण में केवल भविष्य की घटनाओं का वर्णन ही नहीं, बल्कि मानव जीवन के नैतिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक मूल्यों का भी गहन विश्लेषण किया गया है। धर्म, सत्य, दया, संयम, गुरु-सेवा, वेदाध्ययन, भक्ति तथा आत्मशुद्धि को जीवन का वास्तविक आधार बताया गया है।

यह संस्करण विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, पुराण-अध्येताओं, कथावाचकों, धर्मप्रेमियों तथा सनातन संस्कृति में रुचि रखने वाले सभी पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी ग्रन्थ है।

कल्किपुराण (Kalki Puran) पुस्तक का महत्त्व

  • भगवान विष्णु के अंतिम अवतार कल्कि का प्रामाणिक वर्णन।
  • कलियुग के दोषों एवं धर्म की पुनर्स्थापना का विस्तृत विवेचन।
  • संस्कृत मूल पाठ के साथ सरल एवं सहज हिन्दी अनुवाद।
  • धर्म, नीति, सदाचार एवं आत्मचिंतन का उत्कृष्ट ग्रन्थ।
  • भगवान परशुराम, शिव एवं कल्कि से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग।
  • पुराण अध्ययन, शोध एवं प्रवचन के लिए उपयोगी।
  • विद्यार्थियों, धार्मिक संस्थानों एवं पुस्तकालयों हेतु संग्रहणीय संस्करण।
  • शब्दानुक्रमणिका सहित अध्ययन में विशेष सुविधा।