Kamya Ratna Tantram | काम्यरत्न तन्त्रम्
Original price was: ₹410.00.₹390.00Current price is: ₹390.00.
| Author | Acharya Shivanand Mishr |
| Publisher | Shri Kashi Vishwanath Sansthan |
| Language | Sanskrit & Hindi |
| Edition | 2026 |
| ISBN | 978-81-685408-6-6 |
| Pages | 272 |
| Cover | Hard Cover |
| Size | 14 x 4 x 22 (l x w x h |
Description
काम्यरत्न तन्त्रम् (Kamya Ratna Tantram) आचार्य नागभट्ट प्रणीत एक महत्त्वपूर्ण तान्त्रिक ग्रंथ है, जिसमें संस्कृत मूल पाठ के साथ हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया गया है। इस संस्करण का प्रकाशन श्रीकाशी विश्वनाथ संस्थान, वाराणसी द्वारा किया गया है तथा इसके लेखक आचार्य शिवानंद मिश्र हैं। यह पुस्तक हार्डकवर संस्करण में 272 पृष्ठों के साथ संस्कृत एवं हिन्दी भाषा में उपलब्ध है।
भारतीय तान्त्रिक वाङ्मय में मन्त्र, साधना, देवोपासना, ध्यान, अनुशासन तथा विभिन्न तान्त्रिक विधियों का विशेष महत्त्व रहा है। काम्यरत्न तन्त्रम् इसी समृद्ध परम्परा का प्रतिनिधित्व करने वाला ग्रंथ है, जिसमें साधना के विविध पक्षों का व्यवस्थित एवं शास्त्रीय विवेचन प्राप्त होता है।
ग्रंथ में साधना से संबंधित ऋतु, तिथि, वार, नक्षत्र, काल, दिशा, आसन, जपमाला, औषधि, मूलिका, साधना-स्थान तथा मन्त्र-सिद्धि जैसे विषयों का क्रमबद्ध निरूपण किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि तान्त्रिक साधना में केवल मन्त्र-जप ही नहीं, बल्कि उचित समय, स्थान, सामग्री और साधना-विधान का भी विशेष महत्त्व माना गया है।
काम्यरत्न तन्त्रम् में तन्त्रपरम्परा में वर्णित षट्कर्म तथा शान्ति, वशीकरण, स्तम्भन, विद्वेषण, उच्चाटन एवं मारण आदि विषयों का भी उल्लेख मिलता है। इन विषयों को तान्त्रिक साहित्य की पारम्परिक एवं शास्त्रीय पृष्ठभूमि में समझना उपयोगी है। यह ग्रंथ तन्त्रशास्त्र के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साधना-संबंधी पक्षों के अध्ययन के लिए महत्त्वपूर्ण सामग्री प्रदान करता है।
ग्रंथ की एक उल्लेखनीय विशेषता औषधियों एवं मूलिकाओं से संबंधित विवेचन है। इनके संग्रह, ग्राह्यता-अग्राह्यता तथा मन्त्र-संस्कार आदि विषयों का निरूपण तान्त्रिक साधना में द्रव्य, मन्त्र और साधक के समन्वय को दर्शाता है। इस प्रकार यह ग्रंथ केवल प्रयोगों का संग्रह न होकर तान्त्रिक साधना की पारम्परिक संरचना को समझने में सहायक है।
प्रस्तुत संस्करण में संस्कृत मूल पाठ के साथ हिन्दी अनुवाद होने के कारण यह संस्कृत अध्येताओं, तन्त्रशास्त्र के विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा भारतीय आध्यात्मिक एवं तान्त्रिक परम्परा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए उपयोगी है। हिन्दी अनुवाद पाठकों को मूल संस्कृत सामग्री के भाव और विषयवस्तु को समझने में सहायता प्रदान करता है।
तन्त्रग्रंथों का अध्ययन शास्त्रीय, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ में विवेकपूर्वक किया जाना चाहिए। काम्यरत्न तन्त्रम् भारतीय तान्त्रिक साहित्य की परम्परा, साधना-विधान और मन्त्रशास्त्रीय दृष्टिकोण को समझने के लिए एक उपयोगी ग्रंथ है।
काम्यरत्न तन्त्रम् (Kamya Ratna Tantram) पुस्तक का महत्त्व
- तन्त्रशास्त्रीय अध्ययन का महत्त्वपूर्ण ग्रंथ – यह ग्रंथ भारतीय तान्त्रिक परम्परा और उसकी साधना-पद्धतियों को समझने में सहायक है।
- मन्त्र एवं साधना-विधान – इसमें मन्त्र-साधना, मन्त्र-सिद्धि तथा साधना के विभिन्न आवश्यक अनुशासनों का पारम्परिक निरूपण मिलता है।
- षट्कर्म का विवेचन – शान्ति, वशीकरण, स्तम्भन, विद्वेषण, उच्चाटन और मारण जैसे पारम्परिक तान्त्रिक विषयों का उल्लेख मिलता है।
- काल एवं साधना का संबंध – तिथि, वार, नक्षत्र, ऋतु, काल और दिशा आदि के विचार को तान्त्रिक साधना के संदर्भ में समझने का अवसर मिलता है।
- मूलिका एवं औषधि संबंधी सामग्री – विभिन्न द्रव्यों और मूलिकाओं के संग्रह तथा उनके तान्त्रिक प्रयोग से संबंधित परम्परागत विचारों का अध्ययन किया जा सकता है।
- संस्कृत एवं हिन्दी का समन्वय – संस्कृत मूल पाठ के साथ हिन्दी अनुवाद होने से यह ग्रंथ संस्कृत के अध्येताओं तथा हिन्दी पाठकों दोनों के लिए उपयोगी बनता है।
- शोधार्थियों के लिए उपयोगी – तन्त्रशास्त्र, भारतीय संस्कृति, धर्म-अध्ययन, संस्कृत साहित्य एवं भारतीय आध्यात्मिक परम्परा पर शोध करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह संदर्भग्रंथ के रूप में उपयोगी हो सकता है।
- भारतीय तान्त्रिक परम्परा का परिचय – ग्रंथ भारतीय साधना-परम्परा के विविध आयामों को समझने के लिए महत्त्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराता है।







