Yogini Tantram | योगिनी तन्त्रम
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| Author | Acharya Shivanand Mishr |
| Publisher | Shri Kashi Vishwanath Sansthan |
| Language | Sanskrit & Hindi |
| Edition | 2026 |
| ISBN | 978-81-685408-4-2 |
| Pages | 475 |
| Cover | Hard Cover |
| Size | 14 x 4 x 22 (l x w x |
Description
योगिनी तन्त्रम् (Yogini Tantram) तन्त्र साहित्य का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं प्रामाणिक ग्रन्थ है, जो संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद सहित श्रीकाशी विश्वनाथ संस्थान, वाराणसी द्वारा प्रकाशित किया गया है। इस ग्रन्थ के लेखक आचार्य शिवानंद मिश्र हैं। यह पुस्तक हार्डकवर संस्करण, 475 पृष्ठों तथा संस्कृत एवं हिन्दी भाषा में उपलब्ध है।
यह ग्रन्थ भारतीय तन्त्र परम्परा, शाक्त साधना तथा वैष्णव दर्शन के अद्भुत समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। सामान्यतः तन्त्र साहित्य को केवल शाक्त या शैव परम्परा तक सीमित माना जाता है, किन्तु योगिनी तन्त्रम् यह सिद्ध करता है कि शक्ति साधना का अंतिम लक्ष्य भगवान विष्णु के परम पद की प्राप्ति भी हो सकता है। ग्रन्थ में अष्टाक्षर (ॐ नमो नारायणाय) एवं द्वादशाक्षर (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) मन्त्रों की महिमा का विशेष वर्णन मिलता है।
पुस्तक में कामाख्या, नीलाचल, जगन्नाथ पुरी, विविध तीर्थों, योगिनियों, तान्त्रिक साधना, पूजा-विधान, नैवेद्य नियम, पशु-पक्षियों एवं वनस्पतियों का वर्गीकरण तथा अनेक दुर्लभ तान्त्रिक विषयों का विस्तृत विवेचन प्रस्तुत किया गया है। साथ ही यह ग्रन्थ शाक्त एवं वैष्णव परम्पराओं के समन्वय को अत्यन्त प्रभावशाली रूप में दर्शाता है।
सरल हिन्दी अनुवाद के कारण यह पुस्तक केवल विद्वानों एवं शोधार्थियों के लिए ही नहीं, बल्कि तन्त्र, भारतीय दर्शन, संस्कृत साहित्य एवं आध्यात्मिक साधना में रुचि रखने वाले सामान्य पाठकों के लिए भी अत्यन्त उपयोगी है।
योगिनी तन्त्रम् (Yogini Tantram) पुस्तक का महत्त्व
- तन्त्र साहित्य का प्रामाणिक एवं महत्वपूर्ण ग्रन्थ।
- संस्कृत मूल पाठ के साथ सरल हिन्दी अनुवाद।
- शाक्त, शैव एवं वैष्णव परम्पराओं का अद्भुत समन्वय।
- कामाख्या, नीलाचल एवं जगन्नाथ परम्परा का विस्तृत वर्णन।
- अष्टाक्षर एवं द्वादशाक्षर मन्त्रों की महिमा का विवेचन।
- तीर्थ, साधना, पूजा-विधान एवं तान्त्रिक परम्पराओं का विस्तृत अध्ययन।
- शोधार्थियों, संस्कृत विद्यार्थियों एवं तन्त्र साहित्य के अध्येताओं के लिए उपयोगी।
- भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को समझने हेतु महत्वपूर्ण ग्रन्थ।







